(मज़दूर बिगुल के दिसम्‍बर 2018 अंक में प्रकाशित लेख। अंक की पीडीएफ फाइल डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें और अलग-अलग लेखों-खबरों आदि को यूनिकोड फॉर्मेट में पढ़ने के लिए उनके शीर्षक पर क्लिक करें)

सम्पादकीय

पाँच राज्यों के विधानसभा चुनाव में भाजपा की शिकस्त : यह निश्चिंत होने का समय नहीं है बल्कि फासीवाद के विरुद्ध लड़ाई को और व्यापक और धारदार बनाने का समय है!

अर्थनीति : राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

रिज़र्व बैंक और सरकार का टकराव और अर्थव्यवस्था की बिगड़ती हालत / मुकेश असीम

श्रम कानून

आँगनवाड़ी एवं आशा कर्मियों के मानदेय में बढ़ोत्तरी की घोषणा : प्रधानमन्त्री का एक और वायदा निकला जुमला!

फासीवाद / साम्‍प्रदायिकता

बुलन्दशहर की हिंसा : किसकी साज़िश? / नवमीत

संघर्षरत जनता

लुधियाना में मज़दूरों का विशाल रोष प्रदर्शन

फ़्रांस की सड़कों पर फूटा पूँजीवाद के ख़िलाफ़ जनता का गुस्सा / आनन्‍द सिंह

आन्दोलन : समीक्षा-समाहार

दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के ठेका कर्मचारियों की हड़ताल : एक रिपोर्ट

हरियाणा रोडवेज़ की 18 दिन चली हड़ताल की समाप्ति पर कुछ विचार बिन्दु / इन्‍द्रजीत

लुधियाना में औद्योगिक मज़दूरों की फ़ौरी माँग के मसलों पर मज़दूर संगठनों की गतिविधि और इसका महत्व

मज़दूर आंदोलन की समस्याएं

मौजूदा किसान आन्दोलन और इनकी माँगें, क्या इनसे ”किसानी के संकट” और गाँव के ग़रीबों की समस्याओं का हल सम्भव है?

महान शिक्षकों की कलम से

गाँव के ग़रीबों का हित किसके साथ है? / लेनिन

पर्यावरण / विज्ञान

अमीरों के पैदा किये प्रदूषण से मरती ग़रीब आबादी / श्रवण यादव

लेखमाला

लेसनर कारख़ाने में हड़ताल और बोल्शेविकों का काम

मज़दूर बस्तियों से

प्रधानमन्त्री आवास योजना की हक़ीक़त – दिल्ली के शाहबाद डेरी में 300 झुग्गियों को किया गया ज़मींदोज़! / सिमरन

कला-साहित्य

महेश्वर की कविता : वे

मज़दूरों की कलम से

ब्रिटेन के प्रवासी मज़दूरों के बुरे हालात / रिम्‍पी गिल, इंग्‍लैण्‍ड

हमें एकजुटता बनानी होगी / मनीषा, दिल्‍ली