(मज़दूर बिगुल के मार्च 2011 अंक में प्रकाशित लेख। अंक की पीडीएफ फाइल डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें और अलग-अलग लेखों-खबरों आदि को यूनिकोड फॉर्मेट में पढ़ने के लिए उनके शीर्षक पर क्लिक करें)

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सम्पादकीय

पूँजीपतियों और खाते-पीते मध्यवर्ग को ख़ुश करने वाला एक और ग़रीब-विरोधी बजट – सरकारी घाटे का सारा बोझ ग़रीबों पर, अमीरों पर फिर से तोहफ़ों की बौछार

अर्थनीति : राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

न्यूनतम मज़दूरी बढ़ी लेकिन किसकी – आपकी या हमारी? – दिल्ली के विधायकों के वेतन में 300 प्रतिशत वृद्धि और मज़दूरों के वेतन में 15 प्रतिशत की वृद्धि / आशु

संघर्षरत जनता

अरब धरती पर चक्रवाती जनउद्रेक का नया दौर और साम्राज्यवादी सैन्य-हस्तक्षेप / अरुण किशोर नवल

मज़दूर आंदोलन की समस्याएं

ग़द्दार भितरघातियों के विरुद्ध गोरखपुर के मज़दूरों का क़ामयाब संघर्ष

महान शिक्षकों की कलम से

मज़दूरी व्यवस्था / एंगेल्स

लेखमाला

कैसा है यह लोकतन्त्र और यह संविधान किनकी सेवा करता है? (आठवीं किस्त) – डॉ. अम्बेडकर और भारतीय संविधान / आलोक रंजन

माँगपत्रक शिक्षणमाला-5 कार्यस्थल पर सुरक्षा और दुर्घटना की स्थिति में उचित मुआवज़ा हर मज़दूर का बुनियादी हक़ है!

कारखाना इलाक़ों से

बादाम उद्योग में मशीनीकरण: मज़दूरों ने क्या पाया और क्या खोया

मज़दूर बस्तियों से

घुट-घुटकर बस जीते रहना इन्सान का जीवन नहीं है / कृपाशंकर, राजा विहार, बादली औद्योगिक क्षेत्र, दिल्ली-42

गतिविधि रिपोर्ट

मज़दूर माँगपत्रक आन्दोलन-2011 के तहत करावल नगर में ‘मज़दूर पंचायत’ का आयोजन

पटना में दो दिवसीय क्रान्तिकारी नवजागरण अभियान

कला-साहित्य

कहानी – जियोवान्नी समाजवादी कैसे बना / मक्सिम गोर्की

अन्तरराष्ट्रीय स्त्री दिवस (8 मार्च) के अवसर पर एक कविता

मज़दूरों की कलम से

यहाँ-वहाँ भटकने से नहीं, लड़ने से बदलेंगे हालात / इन्द्रजीत, लुधियाना

मज़दूर एकता ज़िन्दाबाद! / घनश्याम पाल लुधियाना