नोएडा-मानेसर पुलिस की गुण्डागर्दी नहीं चलेगी!
यूनियन कार्यकर्ताओं साथी रूपेश, आकृति, सृष्टि और मनीषा को तत्काल रिहा करो!

12 अप्रैल। कलायत के गांव स‍िमला में ब‍िगुुल मज़दूर दस्‍ता व मनरेगा मज़दूर यूनियन द्वारा गुरुग्राम–मानेसर, फरीदाबाद और नोएडा में पुलिस द्वारा मजदूरों व राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर किए जा रहे दमन के ख़‍िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया गया। व‍िरोध प्रदर्शन में मज़दूरों और युवाओं ने भागीदारी की।
मनरेगा यूनियन के अजय ने बताया कि 2 अप्रैल से इन औद्योगिक क्षेत्रों में मज़दूर बढ़ती महँगाई, घटते वेतन, असुरक्षा और बढ़ते काम के घण्‍टों के खिलाफ आवाज़ बुलन्‍द कर रहे हैं तथा सड़कों पर उतरकर हड़ताल में शामिल हो रहे हैं। 8 अप्रैल से नोएडा फेज़-2 में एक्सपोर्ट सेक्टर के मज़दूरों ने भी अपनी बुनियादी मांगों को लेकर हड़ताल शुरू की। इससे घबराकर पूंजीपति वर्ग और सत्ता-समर्थित ताकतें पुलिस बल के जरिए मज़दूरों पर दबाव बना रही हैं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं का दमन कर रही हैं। इसी कड़ी में 11 अप्रैल की शाम को सभा समाप्त होने के बाद लौटते समय 4 मजदूर कार्यकर्ताओं को यूपी पुलिस ने कथित रूप से बोटैनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन से हिरासत में ले लिया, जिनमें 3 महिलाएं भी शामिल थीं, जबकि वहां कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी।
वहीं, उनकी जमानत के लिए पहुंचे वकील प्रतीक कुमार और मोहम्मद तनवीर अली समेत 2 अन्य कार्यकर्ताओं को भी यूपी पुलिस ने कथित रूप से हिरासत में ले लिया। साफ तौर पर यूपी से लेकर हरियाणा के मानेसर तक मज़दूरों पर दमन जारी है। ज्ञात हो कि मानेसर में संघर्षरत 55 मज़दूरों को भी पुलिस ने जेल भेज दिया है।
यूपी और हरियाणा पुलिस द्वारा मज़दूरों व समाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं के इस दमन और उत्पीड़न की हम कड़े शब्दों में निन्दा करते हैं। इसके साथ ही हम सभी इंसाफ़पसन्द, न्यायप्रिय लोगों से यह अपील करते हैं कि पुलिस की इस गुण्डागर्दी के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ उठायें और मज़दूर आन्दोलन के दमन के विरोध में खड़े हों।