(मज़दूर बिगुल के अगस्‍त 2013 अंक में प्रकाशित लेख। अंक की पीडीएफ फाइल डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें और अलग-अलग लेखों-खबरों आदि को यूनिकोड फॉर्मेट में पढ़ने के लिए उनके शीर्षक पर क्लिक करें)

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सम्पादकीय

एक बार फ़िर देश को दंगों की आग में झोंककर चुनावी जीत की तैयारी

अर्थनीति : राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

असली मुद्दा ख़नन की वैधता या अवैधता का नही बल्कि पूँजी द्वारा श्रम और प्रकृति की बेतहाशा लूट का है।

गर थाली आपकी खाली है, तो सोचना होगा कि खाना कैसे खाओगे

संघर्षरत जनता

राष्ट्रपति मोर्सी सत्ता से किनारे, मिस्र एक बार फिर से चौराहे पर / नवगीत

असंगठित क्षेत्र के बादाम मज़दूरों ने 60 से ज्यादा फ़ैक्ट्रियों में 6 दिन की हड़ताल से मालिकों को झुकाया

इलाहाबाद में फासिस्टों की गुण्डागर्दी के ख़िलाफ़ छात्र सड़कों पर

महान शिक्षकों की कलम से

हमारा प्रचार क्रान्तिकारी है / लेनिन

विरासत

फ़ाँसी के तख़्ते से / जुलियस फ़्यूचिक

समाज

आख़िर कब खोलोगे अन्धी आस्था की पट्टी अपनी आँखों से?

दिल्ली की शाहाबाद डेयरी बस्ती में एक और बच्ची की निर्मम हत्या

लेखमाला

कैसा है यह लोकतंत्र और यह संविधान किसकी सेवा करता है (इक्कीसवीं किश्त) – भारतीय राज्यसत्ता: पूँजीपति वर्ग की तानाशाही को मूर्त रूप देता एक दमनकारी तन्त्र / आनन्‍द सिंह

इतिहास

पेरिस कम्यून: पहले मज़दूर राज की सचित्र कथा (नवीं किश्त)

कारखाना इलाक़ों से

लुधियाना के टेक्सटाइल तथा होजरी मज़दूरों ने ‘मज़दूर पंचायत’ बुलाकर अपनी माँगों पर विचार-विमर्श कर माँगपत्रक तैयार किया

गतिविधि रिपोर्ट

‘‘किस्सा-ए-आज़ादी उर्फ 67 साला बर्बादी’’