शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफ़े की माँग को लेकर दिल्ली के जन्तर-मन्तर पर छात्रों-युवाओं का विरोध प्रदर्शन

बिगुल संवाददाता

विगत 20 मई को सीजेपी के बैनर तले पेपर लीक, परीक्षाओं में धाँधली के ख़िलाफ़ और केन्द्रीय शिक्षा मन्त्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफ़े की माँग को लेकर प्रदर्शन की शुरुआत हुई। यह रिपोर्ट लिखे जाने तक आन्दोलन जारी है। पहले दिन प्रदर्शन में 1500 से अधिक छात्र शामिल हुए थे, बाद में उनकी संख्या कम हो गयी। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि वह धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफ़े तक अपने प्रदर्शन को जारी रखेंगे। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस साल नीट परीक्षा में पेपर लीक होने के बाद अब तक अठारह छात्र आत्महत्या कर चुके हैं। तब भी देश के शिक्षा मन्त्री अपनी ज़िम्मेदारी और जवाबदेही स्वीकार करने से भाग रहे हैं।

सीबीएसई द्वारा एक कम्पनी को फ़ायदा पहुँचाने के लिए छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया गया। इन दिनों विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक, धाँधली और घपलेबाजी को लेकर छात्र-युवा आबादी के बीच गहरा आक्रोश व्याप्त है। लगातार बढ़ते आक्रोश के बीच 6 जून को दिल्ली में जन्तर-मन्तर पर सीजेपी ने अपना पहला प्रदर्शन किया था। इसके बाद सीजेपी के द्वारा लखनऊ और पुणे में भी प्रदर्शन किया गया था। जन्तर-मन्तर पर अभी जारी प्रदर्शन दिल्ली में सीजेपी का दूसरा प्रदर्शन है। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने छात्र-युवा आबादी को अपनी पीड़ा व्यक्त करने का और संघर्ष का एक चैनल मुहैया कराया जो निश्चित तौर पर एक प्रशंसनीय काम है। सीजेपी से पहले हुए के प्रदर्शनों में भी धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफ़े की माँग को उठाया जाता रहा है।

प्रदर्शन में शामिल दिशा छात्र संगठन के सदस्य रउफ़ ने बिगुल संवाददाता को बताया – “धर्मेन्द्र प्रधान के नकारेपन के लिए उनसे इस्तीफ़ा देने की माँग करना एकदम जायज़ है। लेकिन शिक्षा और परीक्षा की कुव्यवस्था के लिए धर्मेन्द्र प्रधान के अलावा देश की सरकार की शिक्षा नीति, सरकार द्वारा शिक्षा बजट में लगातार फ़ण्ड की कटौती और एनटीए जैसी कुख्यात संस्था भी ज़िम्मेदार है। कई शैक्षणिक संस्थानों और एजेंसियों  में भाजपा आरएसएस के विचारधारा से सहमत लोगों बैठा दिया गया है, जोकि उस काम के लिए कुशल ही नहीं है। इसलिए छात्रों को इन सभी के ऊपर सवाल उठाना होगा और इस आन्दोलन को एक सूत्रीय माँग से आगे लेकर जाना होगा।” रिपोर्ट लिखे जाने तक यह आन्दोलन को एक सूत्रीय माँग तक ही सीमित था। प्रदर्शन में शामिल लोग पूछ रहे हैं कि आन्दोलन आगे कैसे बढ़ेगा! सीजेपी और नेतृत्व के अन्य लोग प्रदर्शनकारियों के समक्ष आगे का रास्ता बताने में असमर्थ दिख रहे हैं। इस प्रदर्शन में संशोधनवादी पार्टियों के छात्र संगठनों के लोग भी शामिल हैं। सीजेपी के लोगों ने भाषणों में बीजेपी-आरएसएस का नाम लेने से मना कर दिया, इस पर इन तथाकथित छात्र संगठनों ने चुप्पी साध ली जबकि उन्हें देश की शिक्षा प्रणाली की बर्बादी में बीजेपी-आरएसएस की भूमिका को रेखांकित करते हुए सीजेपी के नेतृत्व से दोस्ताना संघर्ष चलाना चाहिए था। संशोधनवादी सीपीआईएमएल लिबरेशन के छात्र संगठन के लोग ज़रूरी सवालों पर चुप्पी साधकर इस आन्दोलन के नेतृत्व में बने रहने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। संशोधनवादी सीपीआईएम के छात्र संगठन के लोग “माँ तुझे सलाम” सरीखे गीतों पर नृत्य कर रहे हैं। इस प्रदर्शन में संशोधनवादी पार्टियों के लोग प्रायः “वन्दे मातरम्” गा रहे हैं और हाथों में तिरंगा लहरा रहें हैं। यह सब इन संशोधनवादी पार्टियों की अवसरवादी राजनीति का ही एक और प्रमाण है।

साथ ही ग़ौर करने वाली बात यह भी है कि नीट परीक्षा दोबारा होने के बाद, प्रदर्शन को जारी रखने एवं आगे बढ़ाने के लिए दिशा का अभाव, बेहद सीमित मुद्दे और प्रदर्शन में एक जैसी चीज़ों का लगातार दोहराव आदि के कारणों से आन्दोलन ढलान की ओर जाता हुआ प्रतीत हो रहा है। इसे दुरुस्त किया जाना चाहिए क्योंकि देश के छात्र-युवा आबादी के एक बड़े हिस्से को इस आन्दोलन से ढेर सारी उम्मीदें हैं।

 

मज़दूर बिगुल, जून 2026