हैदराबाद की मज़दूर बस्ती रामी रेड्डी नगर में घर-घर अभियान
पिछली 20 जुलाई को हैदराबाद के जीडीमेटला औद्योगिक क्षेत्र की मज़दूर बस्ती रामी रेड्डी नगर में क्रान्तिकारी अख़बार मज़दूर बिगुल का प्रचार और वितरण किया गया। इस अभियान के तहत घर-घर जाकर मज़दूरों से सीधी बातचीत की गई और उन्हें अख़बार दिया गया। इस इलाक़े में जीडीमेटला की अलग-अलग फ़ैक्ट्रियों में काम करने वाले मज़दूरों से भरमार है। इनमें ज़्यादातर मज़दूर बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा जैसे राज्यों से आए प्रवासी मज़दूर हैं। कुछ स्थानीय तेलुगु भाषी मज़दूर भी यहाँ रहते हैं। बातचीत के दौरान पटानचेरु की हालिया फ़ैक्ट्री दुर्घटना का भी ज़िक्र किया गया। इस हादसे ने यह साफ़ कर दिया कि ऐसे हादसे अब सिर्फ़ “दुर्घटनाएँ” नहीं रह गए हैं, बल्कि ये मुनाफ़े की हवस में की गई हत्याएँ हैं। सुरक्षा के इंतज़ाम जान-बूझकर नज़रअंदाज़ किए जाते हैं और इसका खामियाज़ा मज़दूरों को अपनी जान और ज़ख़्मों से चुकाना पड़ता है। मज़दूरों ने भी अपने अनुभव साझा किए। कई लोगों ने बताया कि उनकी फ़ैक्ट्रियों में भी गम्भीर हादसे हुए हैं—कहीं मज़दूर बुरी तरह घायल हुए, तो कहीं कुछ साथी हमेशा के लिए अपाहिज हो गए। इन हादसों के बाद भी न मालिकों ने कोई ज़िम्मेदारी ली, न ही प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई की। मज़दूरों ने बताया कि वे अपने घरों से बहुत दूर आकर, सुबह से देर रात तक मेहनत करते हैं, फिर भी उनकी कमाई इतनी नहीं होती कि वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिला सकें या कभी फल जैसे पोषक आहार ही ले सकें। इलाज कराना, किराया देना, या त्योहार मनाना भी उनके लिए एक बोझ बन गया है। अख़बार को लेकर मज़दूरों में अच्छा उत्साह दिखा। उन्हें बताया गया कि मज़दूर बिगुल न तो किसी पार्टी या NGO से चन्दा लेता है, और न ही किसी पूँजीपति से विज्ञापन। यह पूरी तरह मज़दूरों का अपना अख़बार है, जो मज़दूरों के ही सहयोग से चलता है। कई मज़दूरों ने इसे ख़रीदा और इस ज़रूरत को समझते हुए आर्थिक सहयोग भी दिया। मज़दूर बिगुल ऐसा अख़बार है जो मेहनतकशों की आवाज़ को बुलन्द करता है, जो बताता है कि शोषण और अन्याय के ख़िलाफ़ मज़दूरों को संगठित होकर संघर्ष करना होगा। इसमें दुनिया भर के मज़दूर आन्दोलनों की जानकारियाँ मिलती हैं और यह प्रेरणा देता है कि एकजुट होकर कैसे हालात बदले जा सकते हैं। इस अभियान में बहुत से मज़दूरों ने अपनी बातें खुलकर साझा कीं और कहा कि अब और चुप रहना सम्भव नहीं है। बदलाव की शुरुआत मज़दूरों की एकता और संघर्ष से ही होगी। #mazdoorbigul #hyderabad #jeedimetla













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