बजा बिगुल मेहनतकश जाग! चिंगारी से लगेगी आग!!
बीते 12 अक्टूबर को ग्रेटर नोएडा के कुलेसरा में ‘बिगुल मज़दूर दस्ता’ द्वारा मज़दूरों को एकजुट और संगठित करने के लिए मज़दूर बिगुल अख़बार का प्रचार अभियान चलाया गया। आज मज़दूरों-मेहनतकशों को बेहद बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भी 16-16 घण्टे फैक्ट्रियों में हड्डियाँ गलानी पड़ रही हैं। देश की बड़ी मेहनतकश आबादी अच्छी शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार से महरूम है। ग्रेटर नोएडा में काम करने वाले मज़दूरों के बच्चों के लिए एक भी ऐसा स्कूल नहीं है जहाँ वे अपने बच्चों को उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिला सकें, ऐसा अस्पताल नहीं है जहाँ इलाज कराना आसानी से सम्भव हो। पूरा नोएडा और ग्रेटर नोएडा निजीकरण की आग में झुलस रहा है। मज़दूरों को दड़बे जैसे लॉज़ों में ठूँस-ठूँस कर भरा गया है जिनका हर साल किराया बढ़ता रहता है।मौजूदा फ़ासीवादी सरकार ने शोषण भरे ढाँचे को मज़बूत करने का काम किया है जो लोगों को बेरोज़गारी की ओर धकेल रही है। ऐसे में बेहद कम वेतन पर भी एक बड़ी आबादी काम करने को मजबूर है। इस शोषण के ख़िलाफ़ भारत के मज़दूरों में ग़ुस्सा साफ़ झलकता है। क्रान्तिकारी विकल्पहीनता के कारण यह ग़ुस्सा ज़ाया हो रहा है। ऐसे वक़्त में मज़दूर बिगुल अख़बार क्रान्तिकारी वैज्ञानिक विचारधारा और राजनीतिक शिक्षा के प्रचार-प्रसार का काम कर रहा है और आज पूँजीपतियों के अख़बारों के बरअक्स विकल्प के रूप में यह अख़बार मेहनतकशों के बीच है।
मज़दूरों की वर्ग एकता ज़िन्दाबाद।













Recent Comments