बिगुल मज़दूर दस्ता ने गत 4 जनवरी को जीडीमेटला औद्योगिक क्षेत्र की मज़दूर बस्ती रामि रेड्डी नगर में मज़दूर-विरोधी चार लेबर कोड पर एक बैठकी आयोजित की।
इस चर्चा में शामिल मज़दूर यूपी, बिहार व तेलंगाना के रहने वाले हैं, जो कई सालों से जीडीमेटला औद्योगिक क्षेत्र की फ़ैब्रिकेशन फ़ैक्ट्रियों में वेल्डर, दवा प्रोडक्शन व अन्य प्रोडक्शन कार्यों में तथा ड्राइवर के तौर पर काम कर रहे हैं। बातचीत में शामिल ज़्यादातर मज़दूर मोदी सरकार द्वारा लाए गए चार लेबर कोड से अनजान थे। यह तथ्य दर्शाता है कि असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मज़दूर किस तरह अलगाव में 10–12 घंटे काम करके ज़िंदगी बसर करते हैं। इन मज़दूरों को यह नहीं पता कि उनकी ज़िंदगी इन चार नए लेबर कोड से और बदतर हो जाएगी।
बातचीत में चार लेबर कोड पर बात रखते हुए मज़दूरों को श्रम क़ानूनों के इतिहास से अवगत कराया गया। अब तक जितने भी क़ानून बने हैं, उन्हें मज़दूरों ने अपनी क़ुर्बानियों से हासिल किया है। फ़ासीवादी मोदी सरकार ने उन क़ानूनों को रद्द करके ये चार लेबर कोड पूँजीपतियों को तोहफ़े के तौर पर दिए हैं। अब पूँजीपति मनमाने तरीक़े से मज़दूरों का शोषण करके मुनाफ़ा कमा सकते हैं। मज़दूरों के सामने चार लेबर कोड के मज़दूर-विरोधी चरित्र को उजागर किया गया। इस स्थिति से लड़ने के लिए बिगुल मज़दूर दस्ता ने मज़दूरों के सामने संगठित होकर अनिश्चितकालीन आम हड़ताल का रास्ता ही एकमात्र विकल्प के रूप में रखा।
मज़दूरों ने अपने अधिकारों पर हो रहे हमलों को समझते हुए अपने विचार साझा किए। एक मज़दूर ने बताया कि किस तरह हितिरो फ़ार्मा कंपनी में, जहाँ पहले लोडिंग मज़दूरों को ओवरटाइम का भुगतान डबल रेट से मिलता था, अब उन्हें मजबूर करके सिंगल रेट पर ओवरटाइम कराया जाता है। मज़दूरों ने तमाम फ़ैक्टरी समस्याओं को साझा किया और मौजूदा परिस्थिति की गंभीरता को समझते हुए मज़दूरों को एकजुट होकर साथ में जुड़ने की बात कही।
बिगुल मज़दूर दस्ता आगे भी मज़दूर बैठकों को नियमित तौर पर चलाएगा।