ज़बरन रिटायरमेण्ट के विरुद्ध सनबीम के मज़दूरों का संघर्ष
26 मार्च को ज़बरन रिटायरमेण्ट के ख़िलाफ़ गुड़गाँव की सनबीम कम्पनी के 1100 स्थायी (परमानेण्ट) मज़दूर टूल डाउन करके हड़ताल पर चले गये थे। कम्पनी प्रबन्धन द्वारा 33 साला पुराने एक स्टैण्डिंग ऑर्डर (1989) का हवाला देते हुए 25 वर्ष का कार्यकाल पूरा होने या 58 साल की उम्र पूरी होने पर 158 स्थायी मज़दूरों की सेवासमाप्ति (रिटायरमेण्ट) की घोषणा कर दी थी। जिन 158 मज़दूरों की सेवा समाप्ति का नोटिस जारी किया गया उनमें बहुतेरे की उम्र अभी 55 साल भी नहीं हुई है।
सनबीम के इस गुड़गाँव प्लाण्ट में कम्पनी में कुल क़रीब 3000 मज़दूर काम करते हैं जिनमें 1110 स्थायी मज़दूर हैं और 2000 के क़रीब ठेका मज़दूर काम करते हैं। ऐसी स्थिति में कुछ ठेका मज़दूर धरने में शामिल हुए थे। कुछ पर कम्पनी प्रबन्धन का ठेकेदारों के मार्फ़त काम पर वापस आने का दबाव भी बना हुआ था।
इस प्लाण्ट में ऑटोमोबाइल सेक्टर की बड़ी कम्पनियों जैसे हीरो, मारूति-सुज़ुकी जैसी कम्पनियों के लिए डाई कास्टिंग, ट्रोटल आदि कलपुर्जे़ (कम्पोनेण्ट) बनते हैं। इसका प्लाण्ट धारूहेड़ा में भी है। जिसमें क़रीब 2000 मज़दूर काम करते हैं और क़रीब 100 ही स्थायी मज़दूर हैं।
इस मुद्दे को लेकर कम्पनी प्रबन्धन व यूनियन बॉडी की डीएलसी की मध्यस्था में बातचीत भी हुई थी। यूनियन बॉडी के मुकेश का कहना है कि यूनियन बॉडी के दो सदस्यों के कार्यकाल (सर्विस) के 15 साल ही अभी पूरे हुए हैं। उनके नाम भी सेवानिवृत्ति (रिटायरमेण्ट) किये जाने वाले मज़दूरों की सूची में शामिल कर दिये हैंं।
कोरोना काल में लॉकडाउन के बाद अक्टूबर 2020 में नया वेतन समझौता होना था वो भी अभी नहीं हुआ है, अभी पेण्डिंग चल रहा है। कम्पनी प्रबन्धन को वेतन समझौते की औपचारिक नोटिस कम्पनी प्रबन्धन को देने के बावजूद इस पर प्रबन्धन ने कोई वार्ता शुरू नहीं की थी।
मज़दूर बिगुल, अप्रैल 2021













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