मज़दूर अख़बार की क्रान्तिकारी भूमिका
अवनीश कुमार, बाराबंकी
मैंने कहीं पढ़ा था कि रूस में जो मज़दूरों की क्रान्ति हुई उसके पीछे वहाँ के क्रान्तिकारियों द्वारा प्रकाशित अख़बारों की बहुत बड़ी भूमिका थी। न केवल वह अख़बार मज़दूरों को उनके जीवन की समस्याओं के बारे में जागरूक करते थे, बल्कि एेसे अख़बार मज़दूरों को आपस में जोड़ने का भी काम करते थे। फिर भी मैं पूरी तरह नहीं समझ पाया हूँ कि मज़दूर अखबार के द्वारा देश में क्रान्तिकारी पार्टी किस तरह से बनायी जा सकती है। इसके बारे में भी कभी ‘मज़दूर बिगुल’ में लिख सकें तो अच्छा रहेगा। इसके बारे में और पढ़ने की सामग्री भी बताइयेगा।
मज़दूर बिगुल, अक्टूबर-नवम्बर 2015













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