वह धरती से आतंकित हो गया

वरवर राव 

वरवर राव

वरवर राव

धमकी पर धमकी देते हुए
डर पर डर फैलाए
वह खुद डर गया
वह निवास स्‍थान से डर गया
वह पानी से डर गया
वह स्‍कूलों से डर गया
वह हवा से डर गया
आज़ादी को उसने बेड़ियां पहना दीं
मगर हथकड़ियां खनकी
वह उस आवाज से डर गया।