बढ़ती महँगाई और ईंधन की क़ीमतों में बढ़ोत्तरी के ख़िलाफ़ दिल्ली में विरोध प्रदर्शन

बिगुल संवाददाता

महँगाई और ईंधन की क़ीमतों में बढ़ोतरी के ख़िलाफ़ 27 मई को दिल्ली के जन्तर-मन्तर पर एक विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शन में राष्ट्रीय राजधानी के छात्रों-युवाओं, नागरिकों और कलाकारों ने भाग लिया।

वक्ताओं ने कहा कि यही भारतीय जनता पार्टी है, जिसके नेता 2014 से पहले क़ीमतें बढ़ने पर गैस सिलेण्डर सिर पर उठाकर महँगाई के ख़िलाफ़ विरोध करने का नाटक करते थे। मोदी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में नारा दिया था “बहुत हुई महँगाई की मार, अबकी बार मोदी सरकार” लेकिन सत्ता में आते ही उनके इस नारे की हवा निकल गयी।

हालिया विधानसभा चुनाव समाप्त होते ही ईंधन की क़ीमतों में बढ़ोत्तरी जारी है। आज हमें व्यापक जन आन्दोलन के ज़रिये यह माँग उठानी होगी कि महँगाई को कम करने के लिए प्रगतिशील कर प्रणाली लागू की जाये, जिसमें अमीरों पर अधिक कर लगाया जाये और आम जनता को सब्सिडी दी जाये। आज देश की जनता की दुर्दशा के लिए मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियां ज़िम्मेदार हैं। इसके कारण ही ईंधन की क़ीमतों में तेज़ वृद्धि हुई है और जनता महँगाई की मार से कराह रही है। गोदी मीडिया, अपने स्वभाव के अनुरूप, एक बार फिर फ़ासीवादी सत्ता की धुन पर नाचते हुए जनता को यह बता रही है कि अन्तरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण पेट्रोल की क़ीमतों में बढ़ोतरी हुई है। पहले से ही महँगाई, बेरोज़गारी और आर्थिक संकट की मार झेल जनता को अब सरकार संयमी बनने की शर्मनाक सलाह दे रही है। इस संकट के समय भी सरकार रूस और ईरान से सापेक्षतः सस्ती मिलने वाली तेल और गैस आपूर्ति से दूरी बनाकर अमेरिका-इज़राइल धुरी की ओर झुक गयी। यह नीति “देश के महत्वपूर्ण आर्थिक हितों की रक्षा” के लिए नहीं अपनायी गयी थी, बल्कि नरेन्द्र मोदी और एपस्टीन फ़ाइल्स में नामजद हरदीप सिंह पुरी की छवि बचाने के लिए थी। आज मेहनतकश आम लोगों, छात्रों और युवाओं को अडानी, मोदी और हरदीप पुरी के पापों और स्वार्थों का बोझ उठाना पड़ रहा है। वर्तमान प्रधानमन्त्री महँगाई को लेकर चिन्तित नहीं हैं, जो आम लोगों की ज़िन्दगी को असहनीय बना रही है, बल्कि वे पूँजीपति वर्ग के मुनाफ़े को लेकर चिन्तित हैं। इस महँगाई का सबसे बड़ा बोझ मज़दूरों पर पड़ रहा है।

प्रतिरोध सभा को भारत की क्रान्तिकारी मज़दूर पार्टी (RWPI), बवाना औद्योगिक क्षेत्र मज़दूर यूनियन, दिल्ली इस्पात उद्योग मज़दूर यूनियन, करावल नगर मज़दूर यूनियन, दिशा, नौभास और बिगुल मज़दूर दस्ता के प्रतिनिधियों ने सम्बोधित किया।

 

मज़दूर बिगुल, जून 2026

 

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