(मज़दूर बिगुल के अक्‍टूबर 2024 अंक में प्रकाशित लेख। अंक की पीडीएफ़ फ़ाइल डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें और अलग-अलग लेखों-ख़बरों आदि को यूनिकोड फ़ॉर्मेट में पढ़ने के लिए उनके शीर्षक पर क्लिक करें)

 

 

सम्पादकीय

चुनावी समीकरणों और जोड़-घटाव के बूते फ़ासीवाद को फ़ैसलाकुन शिक़स्त नहीं दी जा सकती है!

श्रम कानून

एक बार फिर न्यूनतम वेतन बढ़ाने के नाम पर नौटंकी करती सरकारें! / भारत

फासीवाद / साम्‍प्रदायिकता

हिमाचल प्रदेश में संघी लंगूरों का उत्पात और कांग्रेस सरकार की किंकर्तव्यविमूढ़ता / आशीष

शाखा में साख / अन्वेषक

मोहन भागवत की “हिन्दू” एकजुटता किसके लिए? / आशु

विशेष लेख / रिपोर्ट

रतन टाटा : अच्छे पूँजीवाद का ‘पोस्टर बॉय’

काम के अत्यधिक दबाव और वर्कलोड से हो रही मौतें : ये निजी मुनाफ़े की हवस की पूर्ति के लिए व्यवस्थाजनित हत्याएँ हैं! / आशीष

संघर्षरत जनता

मारुति के मज़दूर एक बार फिर संघर्ष की राह पर!

मज़दूर आंदोलन की समस्याएं

वेतन बढ़ोत्तरी व यूनियन बनाने के अधिकार को लेकर सैम्संग कम्पनी के मज़दूरों की 37 दिन से चल रही हड़ताल समाप्त – एक और आन्दोलन संशोधनवाद की राजनीति की भेंट चढ़ा! / अदिति

विकल्प का खाका

‘हरियाणा विधानसभा चुनाव – 2024’ में भाजपा की जीत के मायने और मज़दूरों-मेहनतकशों के स्वतन्त्र राजनीतिक पक्ष की ज़रूरत

आपदाएं

आख़िर कब तक उत्तर बिहार की जनता बाढ़ की विभीषिका झेलने को मजबूर रहेगी? / विवेक

मज़दूर बस्तियों से

हैदराबाद में कांग्रेस सरकार द्वारा मूसी नदी और झीलों को बचाने के नाम पर ग़रीबों व मेहनतकशों के आशियानों और आजीवका पर ताबड़तोड़ हमला

कला-साहित्य

कविता की ज़रूरत / कविता कृष्‍णपल्‍लवी

अल सल्वाडोर के क्रान्तिकारी कवि रोखे दाल्तोन (1935 – 1975) की कुछ कविताएँ