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आज़ाद ज़िन्दगी के लिए ज़ालिम इस्लामी कट्टरपन्थी पूँजीवादी निज़ाम के ख़िलाफ़ ईरान की औरतों की बग़ावत

गत 16 सितम्बर को ईरान की राजधानी तेहरान में महसा अमीनी नामक कुर्द मूल की 22 वर्षीय ईरानी युवती की मौत के बाद शुरू हुआ आन्दोलन सत्ता के बर्बर दमन के बावजूद जारी है। ग़ौरतलब है कि महसा को 13 सितम्बर को ईरान की कुख्यात नैतिकता पुलिस ने इस आरोप में गिरफ़्तार करके हिरासत में लिया था कि उसने सही ढंग से हिजाब नहीं पहना था और उसके बाल दिख रहे थे। हिरासत में उसको दी गयी यंत्रणा की वजह से वह कोमा में चली गयी और तीन दिन बाद उसकी मौत हो गयी।

पितृसत्ता के ख़िलाफ़ कोई भी लड़ाई पूँजीवाद विरोधी लड़ाई से अलग रहकर सफल नहीं हो सकती!

इस बार 8 मार्च को अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस के 111 साल पूरे हो जायेंगे। यह दिन बेशक स्त्रियों की मुक्ति के प्रतीक दिवस के रूप में मनाया जाता है परन्तु जिस प्रकार बुर्जुआ संस्थानों द्वारा इस दिन को सिर्फ़ एक रस्मी कवायद तक सीमित कर दिया गया है, जिस प्रकार स्त्री आन्दोलन को सिर्फ़ मध्यवर्गीय दायरे तक सीमित कर दिया गया है, जिस प्रकार इस दिन को उसकी क्रान्तिकारी विरासत से धूमिल किया जा रहा है और जिस प्रकार उसे उसके इतिहास से काटा जा रहा है, ऐसे में ज़रूरी है कि हम यह जानें कि कैसे स्त्री मज़दूरों के संघर्षों को याद करते हुए अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की शुरुआत हुई थी।

गीत – रोटी और गुलाब का संघर्ष

यह एक सामूहिक गीत है जिसे 1912 में संयुक्त राज्य अमेरिका की तेईस हजार महिला मजदूरों ने गाया था। ये पच्चीस अलग-अलग राष्ट्रीयताओं की तथा पैंतालीस अलग-अलग भाषाएँ बोलने वाली थीं। इन महिलाओं ने तेजी से बढ़ते हुए वस्त्र उद्योग को तीन महीनों तक (जनवरी–मार्च 1912) एकदम ठप्प कर दिया था। इससे पहले इतिहास में कभी इतनी संख्या में विभिन्न जगहों की महिलाएँ जीवन-निर्वाह से थोड़ी ज्यादा मजदूरी तथा बेहतर जिन्दगी के अधिकार की मांग को लेकर संयुक्त और इतने प्रभावी रूप से किसी हड़ताल में शामिल नहीं हुई थीं।