1 मई अन्तरराष्ट्रीय मज़दूर दिवस की क्रान्तिकारी विरासत ज़िन्दाबाद!
रोहतक शहर के विभिन्न लेबर चौकों पर कार्यक्रम
1 मई को 140 वें मज़दूर दिवस के अवसर पर भारत की क्रान्तिकारी मज़दूर पार्टी (RWPI) और बिगुल मज़दूर दस्ता के द्वारा रोहतक शहर के विभिन्न लेबर चौकों पर कार्यक्रम किये गये। इस अवसर पर मज़दूर साथियों को मई दिवस की ऐतिहासिक विरासत से परिचित कराया गया।
सभाओं में बताया गया कि मई दिवस का इतिहास हमारे लिए ख़ास मायने रखता है। इस दुनिया में एक तरफ़ कमेरों का वर्ग है जिसकी मेहनत के दम पर दुनिया की सारी चमक-दमक क़ायम है। लेकिन मेहनतकशों की ज़िन्दगी तबाह-बर्बाद है। बारह-बारह घण्टे काम करके भी गुजारा नहीं, बच्चों के लिए अच्छे दवा-इलाज़, शिक्षा-रोज़गार तक का प्रबन्ध नहीं हो पाता। दूसरी तरफ़ लुटेरों का वर्ग है जो बिना कुछ किये भी केवल शोषण और लूट के दम पर दुनिया की दौलत पर कब्ज़ा करके बैठा है। सबकुछ पैदा तो कमेरा वर्ग करता है लेकिन फ़िर भी जीवन की बुनियादी ज़रूरतों तक से महरूम रहकर शोषण की चक्की में पिसता रहता है।
इसी अन्याय और शोषण के प्रतिरोध का प्रतीक है मज़दूर दिवस! इस दिन हमारे पुरखों ने अन्याय-अत्याचार के विरुद्ध आवाज़ उठायी थी और आठ घण्टे के कार्यदिवस की माँग के साथ अपने हक़-अधिकारों का बिगुल फूँका था।
मई दिवस का सच्चा सन्देश यही है कि हम अपने शानदार अतीत से प्रेरणा लेकर भविष्य की दिशा का सन्धान करें। मई दिवस के महान शहीदों को हमारी यही सच्ची श्रद्धांजलि हो सकती है।
लेबर चौकों पर आयोजित सभाओं के दौरान नोएडा-मानेसर में हुई हालिया हड़तालों को दबाने और निर्दोष ट्रेड यूनियन एक्टिविस्टों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और बुद्धिजीवियों को तंग और गिरफ्तार करने के पुलिस-प्रशासन के रवैये का विरोध किया गया। मज़दूर साथियों ने कहा कि न्याय के लिए आवाज़ उठाना अपराध नहीं है और सभी एक्टिविस्टों को तत्काल प्रभाव से रिहा किया जाना चाहिए। सभाओं के अन्त में नारे लगाकर नोएडा-मानेसर के श्रमिक संघर्षों के प्रति एकजुटता व्यक्त की गयी।
मज़दूर बिगुल, अप्रैल-मई 2026













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