बिगुल मज़दूर दस्ता और नौजवान भारत सभा, उत्तराखण्ड द्वारा औद्योगिक क्षेत्र सिडकुल-हरिद्वार में मज़दूर-कर्मचारी विरोधी ‘चार लेबर कोड’ के ख़िलाफ़ पर्चा वितरित किया गया‌ और मज़दूरों से इसके ख़िलाफ़ जुझारू संघर्ष खड़ा करने का आह्वान किया गया।

मोदी सरकार द्वारा लाया गया यह चार लेबर कोड आज़ाद भारत में मज़दूरों -कर्मचारियों के अधिकारों पर सबसे बड़ा हमला है। भारत के पूंँजीपति वर्ग द्वारा साम्प्रदायिक फ़ासीवाद को उभारने और सत्ता तक पहुँचाने का असल मक़सद यही था! फ़ासीवादी भाजपा सरकार के कार्यकाल में निजीकरण, ठेकाकरण, मज़दूरों की बदहाल स्थिति अप्रत्याशित रूप से तो देखी ही गयी थी लेकिन इन संहिताओं के ज़रिए अब इन सभी कुकर्मों को क़ानूनी जामा पहना दिया गया है। रेलवे की बात करें तो वहाँ पिछले कुछ वर्षों से ठेकाकरण की रफ़्तार बेहद तेज़ी से बढ़ी है। नयी पेंशन स्कीम की मार झेल रहे कर्मचारियों पर अब छँटनी-तालाबन्दी का संकट आन पड़ा है। चार लेबर कोड के तहत इस ठेकाकरण को क़ानूनी रंग “फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेन्ट” जैसी लफ़्फ़ाज़ शब्दावली से दिया गया है। अब कोई भी नियोक्ता क़ानूनी रूप से किसी व्यक्ति को तीन महीने, छः महीने या एक साल के लिए काम पर रख सकता है और उसके बाद जब चाहे उसे काम से निकाल सकता है। इस तरह मोदी सरकार की साज़िश है कि संगठित-औपचारिक क्षेत्रों में कार्य कर रहे मज़दूर-कर्मचारियों की हालत भी अब असंगठित-अनौपचारिक मज़दूरों की तरह नारकीय हो जाये ताकि धन्नासेठों के मुनाफ़े में अकूत इज़ाफ़ा हो सके।

मज़दूर अधिकारों पर जब इस तरह का संगठित व नियोजित हमला हुआ है तो इसका जवाब भी हमें संगठित, नियोजित और जुझारू तरीके से देना होगा। अब एकदिवसीय रस्मदायगी हड़ताल से बात कत्तई नहीं बनने वाली बल्कि अब हमें अनिश्चितकालीन आम हड़ताल के लिये अभी से कमर कस लेनी होगी। इसके लिए मज़दूरों-कर्मचारियों की सभी यूनियनों को साथ आकर आम हड़ताल की तैयारी करनी होगी।
 

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