डीटीसी के कॉण्ट्रैक्ट कर्मचारियों का संघर्ष ज़िदाबाद!
मज़दूर एकता ज़िन्दाबाद!

डीटीसी के बस चालक और कण्डक्टर बीते 16 नवम्बर से प्रदर्शनरत हैं।
दिल्ली के भयंकर प्रदूषण और ठण्ड को झेलते हुए सैंकड़ों महिला और पुरुष डीटीसीकर्मी अपनी माँगो को लेकर दिन-रात सरोजिनी नगर डिपो पर धरने पर बैठे हैं।

उनकी प्रमुख माँगों में समान काम के लिए समान वेतन व ठेके पर काम ख़त्म करके पक्की नौकरियों की माँग प्रमुख है। यह धरना तब शुरू हुआ जब सरोजिनी नगर डिपो को भारत का पहला महिला डिपो ‘पिंक डिपो’ बनाने के लिए कैलाश गहलोत ने उसका उद्घाटन किया। हड़ताल की शुरुआत सरोजिनी नगर बस डिपो की महिला कर्मचारियों से हुई जो अपने पुरुष समकक्षों के समान वेतन की माँग कर रही थीं और महिला डिपो का विरोध कर रहीं थी। महिलाकर्मियों ने बताया कि दिल्ली के अलग-अलग इलाक़ों से उनका पिंक डिपो तक पहुँचना बेहद असुविधाजनक होगा और यह सरकार के द्वारा उठाया गया एक महिला-विरोधी क़दम है।

पिछले कई वर्षों से डीटीसी के कर्मचारी समान वेतन और संविदा कर्मचारियों को नियमित करने की अपनी माँगों के साथ संघर्षरत हैं लेकिन अभी तक केजरीवाल सरकार की तरफ़ से उनकी माँगो पर कोई ठोस क़दम नहीं उठाया गया है। इसके विपरीत, सरकार ने परिवहन के सार्वजनिक विभाग को निजी कम्पनियों के हाथों में देने की शुरुआत कर दी है और लगातार नयी भर्तियाँ ठेके पर की जा रही हैं। निजीकरण की नीतियों के ख़िलाफ़ और दिल्ली सरकार के कर्मचारी-विरोधी रवैये के ख़िलाफ़ मज़दूर बिगुल की तरफ से डीटीसीकर्मियों की माँगों का समर्थन किया गया।
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