उठो मज़दूरो आगे आओ!
लड़कर नया समाज बनाओ!!
बीते 4 अक्टूबर को बिगुल मज़दूर दस्ता द्वारा गुड़गाँव (हरियाणा) स्थित रिको कम्पनी के पास मज़दूर बिगुल अख़बार का वितरण अभियान चलाया गया।
रिको कम्पनी में अधिकतम मज़दूर ठेके पर काम करते हैं, जिनकी 12 घण्टे की शिफ़्ट चलती है। 12 घण्टे काम करने के बावजूद उन्हें 15-17 हज़ार ही वेतन मिलता है। यहाँ से रिको कम्पनी के अलावा महाले, सनबीम, जेबीएम, कमस्टार, मैगनम आदि ऑटो कम्पनियों के मज़दूरों के साथ-साथ अन्य कम्पनियों के मज़दूर भी गुज़रते हैं।
बिगुल मज़दूर दस्ता के साथियों ने बात रखते हुए बताया कि मज़दूर वर्ग को अपने क्रान्तिकारी अख़बार के ज़रिये ही जागरूक और एकजुट किया जा सकता है। बिगुल अख़बार सिर्फ़ मज़दूरों के कार्यस्थलों व रिहायशी समस्याओं को ही नहीं उठाता बल्कि उन्हें उनके ऐतिहासिक मिशन यानी मज़दूर राज की स्थापना के लिए संघर्ष से भी परिचित करवाता है। आज मज़दूर वर्ग का अपना क्रान्तिकारी मीडिया ही उसे सही विचारों से लैस करके वर्गीय चेतना पैदा कर सकता है और संघर्षों को सही दिशा दे सकता है। ‘मज़दूर बिगुल’ किसी पूँजीपति या कॉरपोरेट के पैसों पर नहीं, बल्कि मज़दूर-मेहनतकश और इन्साफ़पसन्द लोगों के सहयोग से संचालित होता है।
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लखनऊ
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बुर्जुआ अख़बार पूँजी की विशाल राशियों के दम पर चलते हैं। मज़दूरों के अख़बार ख़ुद मज़दूरों द्वारा इकट्ठा किये गये पैसे से चलते हैं।
मज़दूरों के महान नेता लेनिन
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