दिल्ली के बादली रेलवे स्टेशन पर मज़दूर बिगुल अख़बार का अभियान चलाया गया। मालूम हो कि यहाँ से मज़दूरों की एक बड़ी आबादी फैक्टरी-कारखानों में काम करने के लिये जाती है। बादली इण्डस्ट्रियल एरिया से लेकर बवाना, नरेला, सोनीपत के कारख़ानों में खटने के लिए सुबह-सुबह मज़दूरों की एक फौज यहाँ से गुजरती है। इनमें से अधिकांश मज़दूरों के काम के घण्टे 12 से 14 हैं और इन्हें बमुश्किल 12-15 हज़ार रुपये महीने की मज़दूरी मिल पाती है। फ़ासीवादी मोदी सरकार के सत्तासीन होने के बाद से श्रम क़ानूनों पर हुए हमले और फैक्टरी मालिकों को मिली छूट की वज़ह से काम और जीवन की परिस्थितियाँ बेहद नारकीय हुई हैं।
इस वक़्त दिल्ली में जानलेवा प्रदूषण की मार भी सबसे अधिक मेहनतकशों-मज़दूरों के ऊपर पड़ रही है। नरेला, बवाना जैसे औद्योगिक इलाक़ों में वायु की गुणवत्ता असहनीय स्तर पर पहुँच चुकी है और इससे निपटने के लिए सरकार तत्काल कोई कड़े कदम भी नहीं उठा रही है। प्रदूषण के कारणों और सरकार की नाकामी पर लोगों से बातचीत हुई।
इसके साथ ही अभियान के दौरान एसआईआर के फ़र्जीवाड़े और वोट चोरी जैसे ज़रूरी मसले पर भी बात की गयी। लाखों मज़दूरों, मेहनतकशों, स्त्रियों, अल्पसंख्यकों के मताधिकार को छीनने के पीछे भाजपा सरकार की मंशा और इसके ख़िलाफ़ एकजुट होने की ज़रूरत पर लोगों ने अपनी राय रखी। बिगुल मज़दूर दस्ता के साथियो ने लोगों से बातचीत के दौरान अक्टूबर क्रान्ति की विरासत से भी उन्हें परिचित कराया और पर्चे दिये।
मज़दूर बिगुल अख़बार मज़दूरों-मेहनतकशों का अपना क्रान्तिकारी राजनीतिक अख़बार है जो मज़दूर वर्ग को न सिर्फ़ उनके रोज़मर्रा के मसलों पर सही नज़रिया देता है बल्कि देश और दुनिया की तमाम घटनाओं पर मज़दूर वर्गीय पक्ष रखता है और इस शोषणकारी व्यवस्था के ख़िलाफ़ उन्हें एकजुट-संगठित होने का और अपने संघर्ष को आगे बढ़ाने का सही रास्ता भी बताता है।
 

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