‘बिगुल मज़दूर दस्ता’, उत्तराखण्ड की ओर से औद्योगिक क्षेत्र सिडकुल-हरिद्वार में मज़दूर विरोधी चार लेबर कोड के ख़िलाफ़ प्रचार अभियान चलाया गया। मज़दूरों से बातचीत की गयी कि ये लेबर कोड मज़दूरों-कर्मचारियों के सभी अधिकारों की हत्या है। ये अपने संघर्षों के दम पर हासिल किये गये अबतक के हमारे सभी हक़ों पर मोदी सरकार का सबसे बड़ा फ़ासीवादी हमला है। यह मजदूरों-कर्मचारियों की पूरी मेहनतकश आबादी को गुलामों में तब्दील करने का एक फ़ासीवादी उपक्रम है। यह वक़्त है कि भारत के सभी संगठित व असंगठित मज़दूर-कर्मचारी एक साथ संगठित होकर लड़ें और फ़ासीवादी मोदी सरकार के इस हमले का संगठित होकर जवाब दें। यह वक़्त है जब सभी केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों-संघों (ज़ाहिरा तौर पर बीएमएस को छोड़कर जो इस वक़्त भी मोदी सरकार के सुर में सुर मिला रही है) व कम्पनियों-पेशों आदि की यूनियनों को अपने आपसी मतभेद भुलाकर एक साथ आना चाहिए। सबको एक साथ मिलकर अनिश्चितकालीन आम हड़ताल का आह्वान करना चाहिए और इन लेबर कोड्स के वापस लेने तक अनिश्चितकालीन आम हड़ताल को जारी रखना चाहिए।

 

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मज़दूरों के महान नेता लेनिन