अब न समय है, जूझना ही तय है!

 

12 फ़रवरी की एक दिवसीय हड़ताल को सफल बनाते हुए अनिश्चितकालीन
आम हड़ताल की ओर आगे बढ़ो!
 

बिगुल मज़दूर दस्ता, उत्तराखण्ड की तरफ से देहरादून के बैंकों, बीमा, रेलवे , परिवहन एवं डाक विभाग में मज़दूर-कर्मचारी विरोधी ‘चार लेबर कोड’ के ख़िलाफ़ व्यापक अभियान चलाया गया और कर्मचारियों से यह बातचीत की गयी कि हमें 12 फ़रवरी की एक दिवसीय हड़ताल को सफल बनाते हुए तत्काल अनिश्चितकालीन आम हड़ताल का आह्वान करना होगा और तब तक अपनी लड़ाई को जारी रखना होगा जब तक कि सरकार लेबर कोड को वापस न ले ले।
संगठित और असंगठित क्षेत्र दोनों के आम मज़दूर और कर्मचारी सभी अच्छी तरह से समझते हैं कि आज अनिश्चितकालीन आम हड़ताल का आह्वान करने का समय है, कि अब रस्मी कवायदों का नहीं, बल्कि फैसलाकुन लड़ाई का वक़्त है! या तो लेबर कोड वापस लो, या तुम्हारे मुनाफ़े और निज़ाम का चक्का जाम ! हड़ताल का अर्थ ही मालिक वर्ग और सरकार को अपनी जायज़ माँगों पर झुकाना होता है और यह तभी हो सकता है जब उनके मुनाफे का चक्का जाम हो। काम बन्द, मुनाफ़ा ठप्पः एकदिवसीय हड़तालों को तो मालिक वर्ग व उसकी सरकार भी स्वीकार कर लेती है और पिछले तीन दशकों में यही हुआ है।
 

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मज़दूरों के महान नेता लेनिन