अभी तो ली अंगड़ाई है! आगे और लड़ाई है!!
गैस की किल्लत और बढ़ती महँगाई के बीच गुरुग्राम जैसे महँगे शहर में मात्र 10–11 हज़ार रुपये के वेतन पर गुज़ारा करना बेहद मुश्किल है। आज सभी मज़दूर इलाकों में एलपीजी गैस ₹250 से ₹300 प्रति लीटर तक मिल रही है। ढाबों, होटलों से लेकर खाने-पीने की वस्तुएँ लगातार महँगी होती जा रही हैं।
मोदी सरकार द्वारा चार लेबर कोड के प्रचार-प्रसार में यह भ्रम फैलाया गया था कि मज़दूरों के वेतन में बढ़ोतरी होगी, नियुक्ति पत्र मिलेगा और ओवरटाइम का भुगतान डबल रेट पर किया जाएगा।
लेकिन आज सभी जानते हैं कि ये नए मज़दूर-विरोधी लेबर कोड मज़दूरों की गुलामी का दस्तावेज़ साबित हो रहे हैं। असल में ठेकेदार और मालिक मज़दूरों का जमकर शोषण कर रहे हैं। जिसके ख़िलाफ़ हमें एकजुट होकर आवाज़ उठानी होगी।
मज़दूरों की माँगें पूरी तरह जायज़ हैं—न्यायपूर्ण वेतन, बेहतर कार्य-परिस्थितियाँ और ठेका प्रथा का अंत। आज यह संघर्ष केवल गुड़गांव-मानेसर के मज़दूरों का नहीं, बल्कि पूरे मज़दूर वर्ग का संघर्ष है। ठेका प्रथा के ज़रिये जारी शोषण के ख़िलाफ़ सभी मज़दूरों को एकजुट होकर लड़ना होगा।
बिगुल मज़दूर दस्ता की अपील है कि आज गुरुग्राम, दिल्ली और पूरे एनसीआर के मज़दूर एक साझा मांग-पत्र तैयार करें और तालमेल कमेटी बनाकर इस संघर्ष को आगे बढ़ाएँ।
 

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मज़दूरों के महान नेता लेनिन