एक बार फिर विकल्पहीनता की स्थिति से गुज़रती श्रीलंका की जनता
गोटाबाया राजपक्षे को राष्ट्रपति पद से हटाने के बाद भी श्रीलंका की जनता सड़कों पर है। श्रीलंका की संसद ने रानिल विक्रमसिंघे को राष्ट्रपति चुना है लेकिन जनआन्दोलन अभी भी जारी है। लोगों का कहना है कि रानिल विक्रमसिंघे जनता द्वारा चुना गया प्रतिनिधि नहीं है इसलिए लंका की जनता उसे राष्ट्रपति की तरह नहीं स्वीकार करेगी। विक्रमसिंघे के चुने जाने से भी जनता को किसी भी तरह के परिवर्तन की कोई उम्मीद नहीं है। यह सही भी है क्योंकि रानिल विक्रमसिंघे उसी सम्भ्रान्त शासक परिवार का हिस्सा है जो देश के संसाधनों और मज़दूर-मेहनतकश जनता की मेहनत को लूटने वाली देशी-विदेशी पूँजी की ख़िदमत में आज़ादी के बाद से लगा हुआ है।






















