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ब्रह्माण्ड के रहस्यों को सुलझाने की दिशा में बढ़ा इन्सान का एक और क़दम

मनुष्य हमेशा ही ब्रह्माण्ड के रहस्यों को समझने की कोशिश करता रहा है। हज़ारों साल पहले जब मनुष्य जंगलों में रहता था तब उसे प्रकृति के रहस्य जादू-टोने की तरह लगते थे और वह मौसम बदलने, बिजली गिरने, जीवन और मृत्यु जैसी प्राकृतिक घटनाओं को अदृश्य और जादुई शक्तियों के कारनामे के रूप में देखता था। जिन चीज़ों को वह समझ नहीं पाता था और जिनसे उसे डर लगता था उनकी वह पूजा करने लगता था। बाद में मनुष्यता जैसे-जैसे ज्ञान-विज्ञान की राह पर आगे बढ़ती गयी, वैसे-वैसे कुदरत की किताब के पन्ने उसके आगे खुलते चले गये और अपने आसपास होने वाली घटनाओं के कारणों को मनुष्य समझने लगा। ख़ासतौर पर पिछले 200-300 वर्ष के दौरान तो विज्ञान का ज़बर्दस्त विकास हुआ है और मनुष्य अपनी धरती और पूरे ब्रह्माण्ड के बारे में अधिकाधिक ज्ञान हासिल करता गया है। प्रकृति के इन रहस्यों की समझदारी से मनुष्य के जीवन को बेहतर बनाने वाले बहुत-से आविष्कार भी हुए और साथ ही समाज व्यवस्था को ज्यादा न्यायपूर्ण बनाने के संघर्ष में भी इस ज्ञान ने मनुष्य को राह दिखायी। इसीलिए शासक वर्ग हमेशा ही यह कोशिश करते रहे हैं कि आम लोगों तक विज्ञान की समझदारी और जीवन को देखने की वैज्ञानिक दृष्टि न पहुँच सके।