(बिगुल के नवम्‍बर 2009 अंक में प्रकाशित लेख। अंक की पीडीएफ फाइल डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें और अलग-अलग लेखों-खबरों आदि को यूनिकोड फॉर्मेट में पढ़ने के लिए उनके शीर्षक पर क्लिक करें)

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सम्पादकीय

एक युद्ध जनता के विरुद्ध : पूरे देश में सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) कानून लागू करने की तैयारी – दबे पाँव दहलीज़ तक आ पहुँचा है अघोषित आपातकाल! उसकी आहट पहचानो, ख़ूनी पंजों के निशानों की शिनाख्त करो!

अर्थनीति : राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

जानलेवा महँगाई ग़रीबों के जीने के अधिकार पर भी हमला है!

एक तो महँगाई का साया, उस पर बस किराया बढ़ाया

बुर्जुआ मीडिया / संस्‍कृति

थैली की ताकत से सच्चाई को ढँकने की नाकाम कोशिश / आन्दोलन ख़त्म होने के बाद संयुक्त मज़दूर अधिकार संघर्ष मोर्चा की ओर से जारी पर्चा

संघर्षरत जनता

गोरखपुर में मज़दूर आन्दोलन की शानदार जीत – मज़दूरों की जुझारू एकता और भारी जनदबाव के आगे प्रशासन झुकने के लिए बाध्य – सरकारी आतंक का मुँहतोड़ जवाब! गिरफ्तार साथियों की बिना शर्त रिहाई!श्रम कानून लागू कराने की लम्बी लड़ाई में एक कड़ी! पूर्वी उत्तर प्रदेश के मज़दूरों में संघर्ष की चेतना जगायी!

सबसे ज्यादा जुझारू तेवर के साथ अन्त तक डटी रहीं स्त्री मज़दूर

देशभर से मज़दूर आन्दोलन के साथ खड़े हुए मज़दूर संगठन, नागरिक अधिकार कर्मी, बुद्धिजीवी और छात्र-नौजवान संगठन

गुड़गाँव में हज़ारों-हज़ार मज़दूर सड़कों पर उतरे – यह सतह के नीचे धधकते ज्वालामुखी का संकेत भर है

मज़दूर आंदोलन की समस्याएं

केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों का संयुक्त तमाशा – शर्म इनको मगर नहीं आती!

महान शिक्षकों की कलम से

बुर्जुआ जनवाद : संकीर्ण, पाखण्डपूर्ण, जाली और झूठा; अमीरों के लिए जनवाद और गरीबों के लिए झाँसा

लेखमाला

अदम्‍य बोल्‍शेविक – नताशा एक संक्षिप्त जीवनी (समापन किश्त) / एल. काताशेवा

फ़ासीवाद क्या है और इससे कैसे लड़ें? (पाँचवीं किश्त) – भारतीय समाज में फ़ासीवाद की ज़मीन और उसके सामाजिक अवलम्ब / अभिनव

इतिहास

अक्टूबर क्रान्ति की वर्षगाँठ (7 नवम्बर) के अवसर पर – अक्टूबर क्रान्ति के नये संस्करण के निर्माण का रास्ता ही मुक्ति का रास्ता है!

गतिविधि रिपोर्ट

अक्टूबर क्रान्ति की 91वीं वर्षगाँठ पर बिगुल मज़दूर दस्ता की ओर से ”मज़दूरों का समाजवाद क्या है” विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन

गोरखपुर मजदूर आन्दोलन ने नयी राजनीतिक हलचल पैदा की