Table of Contents
(बिगुल के अप्रैल 2002 अंक में प्रकाशित लेख। अंक की पीडीएफ फाइल डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें और अलग-अलग लेखों-खबरों आदि को यूनिकोड फॉर्मेट में पढ़ने के लिए उनके शीर्षक पर क्लिक करें)
![]()
सम्पादकीय
विपक्ष के नपुंसक विरोध और संसदीय गुलगपाड़े के बीच आंतकवाद निरोधक कानून पर संसद की मुहर
अर्थनीति : राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय
चीन में खुले बाजार की नीतियों का “चमत्कार” : छंटनी-तालाबन्दी-महंगाई-बेकारी-तबाही और भ्रष्टाचार : मेहनतकशों की हड़तालों-प्रदर्शनों का अन्तहीन सिलसिला / योगेश पन्त
बेबस हताश मजदूर मैनेजरों की हत्या कर अपना गुस्सा उतार रहे हैं
पश्चिम बंगाल व राजस्थान सरकार के बजट : पक्ष-विपक्ष सब एक हैं, सब पूँजी के चाकर हैं
देवू कंपनी बीमार : साढ़े चार सौ मज़दूरों पर पड़ी छंटनी की मार
फासीवाद / साम्प्रदायिकता
गुजरात में खून की होली खेलने वाल धर्मध्वजाधारी पूँजी के चाकर हैं, हैवानियत के पुजारी हैं
गुजरात : फासीवादी भाजपा बेनकाब / तपीश मैंदोला, जयपुर
संघर्षरत जनता
होण्डा पावर प्रोडक्ट के मजदूरों ने आरपार की लड़ाई के लिए कमर कसी : अवैध तालाबन्दी और मजदूरों का आन्दोलन जारी
बार्सिलोना में विश्व पूँजीवाद के मुंह पर कालिख पुती : पर फैसलाकुन शिकस्त के लिए विश्व सर्वहारा की सेना सजानी होगी / ललित
मुनाफाखोरों के हक में श्रम कानून बदलने के खिलाफ : राजधानी रोम की सड़कों पर मेहनतकशों का सैलाब
व्यापक मेहनतकश एकता की दिशा में कंट्रोल्स ग्रुप के मजदूरों की पहल उम्मीद जगाती है / अजय
बुर्जुआ जनवाद – दमन तंत्र, पुलिस, न्यायपालिका
हापुड़ में बेगुनाह नौजवानों को पुलिस ने आतंकवादी बताकर पकड़ा और पोटो लगाया
बुर्जुआ जनवाद – चुनावी नौटंकी
दिल्ली में नगर निगम चुनाव : मगरूर, सत्ता-मद में चूर भाजपाइयो, देखो जनता ने तुम्हें फिर खारिज कर दिया है, क्या अब अपने लिए नयी जनता चुनोगे?
साम्राज्यवाद / युद्ध / अन्धराष्ट्रवाद
नेपाली प्रधानमंत्री देउबा की भारत यात्रा : जनता के दमन में मदद का ठोस वादा लेकर लौटे
लेखमाला
पार्टी की बुनियादी समझदारी (अध्याय-5) चौदहवीं किश्त
जन्मदिवस के अवसर पर – लेनिन के साथ दस महीने – ग्याहरवीं किश्त / अल्बर्ट रीस विलियम्स
गतिविधि रिपोर्ट
शहीदे आजम भगतसिंह, राजगुरू व सुखदेव के 71वें शहादत दिवस 23 मार्च के अवसर पर जन संगठनों द्वारा कई कार्यक्रम
चुनावी राजनीति भण्डाफोड़ अभियान और जनसभा : ‘क्रान्तिकारी लोक-स्वराज्य ही जनता का सच्चा जनतंत्र होगा’
कला-साहित्य
कविता – कौन तोड़ेगा तेरी बेड़ियां / बेर्टोल्ट ब्रेष्ट
आपस की बात
फासिस्टों को बेनकाब करना जरूरी है / राजेन्द्र आर्य ‘आरोही’, मेरठ
मज़दूरों की कलम से
एकजुटता ही हमारी ताकत / आलिम अहमद, नोएडा













