बादल सरकार का महज़ एक नया ड्रामा ‘पंजाब प्रवासी कल्याण बोर्ड’
ऐसा शायद पहली बार हुआ है कि किसी राज्य की सरकार ने अपने ही देश के अन्य राज्य से आये लोगों के ‘कल्याण’ के लिए अलग से कोई बोर्ड गठित किया है। वह भी उसे प्रवासी कहते हुए। भला अपने ही देश में कोई प्रवासी कैसे हो सकता है? प्रवासी शब्द का इस्तेमाल लोगों के क्षेत्रीय पूर्वाग्रहों का फ़ायदा उठाने के लिए किया गया है। इससे पंजाब में अन्य राज्यों से आकर बसे लोगों का कोई कल्याण तो होने वाला तो है नहीं, बल्कि इसकी जगह इस तरह के बोर्ड का अलग से गठन लोगों के क्षेत्रीय पूर्वाग्रहों को और मज़बूत ही बनायेगा। इससे पंजाब में पहले से रह रहे लोगों और अन्य राज्यों से आये लोगों के बीच दूरियाँ कम होने के बजाय और बढ़ेंगी क्योंकि इस बोर्ड के गठन के ज़रिये लोगों में इस पूर्वाग्रह को और मज़बूती ही मिलती है कि पंजाब में पहले से रह रहे लोगों के लिए अन्य राज्यों से आये लोग अपने नहीं पराये हैं। इससे पंजाब में अन्य राज्यों से आये लोगों के लिए समस्याएँ बढे़ंगी ही।













