Tag Archives: कवितायें / गीत

कविता – मैं कभी पीछे नहीं लौटूँगी / मीना किश्‍वर कमाल Poem – I will never return / Meena Keshwar Kamal

अब मुझे कमजोर और नाकारा न समझना
अपनी पूरी ताकत के साथ मैं तुम्‍हारे साथ हूँ
अपनी धरती की आजादी की राह पर
मेरी आवाज घुलमिल गयी है हजारों जाग उठी औरतों के साथ

कविता – जो पैदा होंगी हमारे बाद / अज्ञात

ये मत कहो बहनो कि तुम कुछ नहीं कर सकतीं
आस्था की कमी अब और नहीं
हिचक अब और नहीं
आओ, पूछें अपने आप से
क्या चाहते हैं हम?

कविता – मेरे क्रोध की लपटें / एक फिलिस्‍तीनी स्‍त्री

तुमने मुझे बाँधा है
जकड़ा है ज़ंजीरों में
पर लपटें मेरे क्रोध की
धधकती हैं, लपकती हैं।
नहीं कोई आग इतनी तीखी
क्योंकि मेरी पीड़ा के ईंधन से
ये जीती हैं, पनपती हैं।

कविता – शुरुआत की सुबह / शंकर गुहा नियोगी

सिर्फ वेदनाएं
दुख की गाथाएं
चलती रहेंगी अनंत काल तक
या
हम उठ खड़े होंगे
अंतिम क्षड़ों में?
अन्‍त नहीं होगा
जहां अन्‍त होना था,
वहीं शुरुआत की सुबह खिल उठेगी।

कविता – वह धरती से आतंकित हो गया / वरवर राव

धमकी पर धमकी देते हुए
डर पर डर फैलाए
वह खुद डर गया
वह निवास स्‍थान से डर गया
वह पानी से डर गया
वह स्‍कूलों से डर गया
वह हवा से डर गया
आज़ादी को उसने बेड़ियां पहना दीं
मगर हथकड़ियां खनकी
वह उस आवाज से डर गया।

नज्‍़म – निवाला / अली सरदार जाफ़री

जब यहाँ से निकल के जाएगा
कारखानों के काम आयेगा
अपने मजबूर पेट की खातिर
भूक सरमाये की बढ़ाएगा

कविता – फिर लोहे के गीत हमें गाने होंगे / शशिप्रकाश

सत्ता के महलों से कविता बाहर लानी होगी ।
मानवात्‍मा के शिल्पी बनकर आवाज़ उठानी होगी ।
मरघटी शान्ति की रुदन भरी प्रार्थना रोकनी होगी ।
आशाओं के रण-राग हमें रचने होंगे ।
फिर लोहे के गीत हमें गाने होंगे ।

जोसेफ़ स्तालिन की एक दुर्लभ कविता

उसकी पीठ और कमर झुक गई थी
लगातार काम करते करते।
जो कल तक दासता की बेड़ियों में बंद
घुटने टेके हुए था,
वह अपनी आशा के पंखों पर उड़ेगा
सबसे ऊपर, ऊपर उठेगा।
मैं कहता हूँ उसकी ऊंचाई पर
पहाड़ तक
अचरज और ईर्ष्या करेंगे।

कविता – उन्नीस सौ सत्रह, सात नवम्बर / नाज़ि‍म हिकमत

और यूँ दर्ज की बोल्शेविकों ने इतिहास में
इतिहास के सर्वाधिक गम्भीर मोड़-बिन्दु की तारीख़:
उन्नीस सौ सत्रह
सात नवम्बर!

कविता : अंधेरे के सभी लोगों के लिए सूर्य के फल हों / पाब्‍लो नेरूदा

मैं सोचता हूँ जिन्होंने इतने सारे काम किये
उन सबका मालिक भी उन्हीं को होना चाहिए।
और जो रोटी पकाते हैं उन्हें वह खानी भी चाहिए।
और खदान में काम करने वालों को रोशनी चाहिए।