हरियाणा के सफ़ाई कर्मचारियों की जुझारू हड़ताल समाप्त—16 सूत्री माँगों पर समझौता!
यूँ तो मोदी सरकार सफ़ाईकर्मियों के चरण धोने की नौटंकी करती है। ‘स्वच्छ भारत अभियान’ जैसे तमाशों में तमाम खाये-पिये-अघाये भाजपाई हाथों में झाड़ू उठाकर फ़ोटो खिंचवाने का ढोंग करते हैं, लेकिन इस नौटंकी से आगे बढ़कर सफ़ाईकर्मियों के बदतर हालात की किसी को कोई फ़िक्र नहीं है। वहीं सरकार में बैठे कृष्णा बेदी जैसा अवसरवादी नेता भी हड़ताल के दौरान कर्मचारियों को सबक़ सिखाने और सख़्त कार्रवाई का आदेश देता रहा था। असल में जाति-आधारित पहचान की राजनीति करने वाले इन धोखेबाज़ नेताओं से कोई उम्मीद पालना बेमानी है। मेहनतकश वर्ग का हर आन्दोलन जात-पात के नाम पर खड़े किये गये नक़ली नेताओं की असली पहचान करवा देता है। हरियाणा के सफ़ाई कर्मचारियों के आन्दोलन को तोड़ने में भाजपा के दलित नेता ही ठेकेदार की भूमिका निभा रहे थे और उनके असली चेहरे हड़ताल के दौरान उजगार भी हो गये। इसलिए मेहनतकश वर्ग के संघर्ष में कमेरों की वर्गीय एकजुटता क़ायम रखनी चाहिए और लुटेरे वर्ग का पर्दाफाश करना चाहिए—चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का हो।






















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