Tag Archives: कलायत

मनरेगा मज़दूरों की माँग: ‘पूरे साल काम दो, काम के पूरे दाम दो!’

वैसे तो मनरेगा क़ानून के अन्तर्गत 100 दिन के रोज़गार की बात ही अपने आप में इस देश के मज़दूरों और गरीबों के साथ एक भद्दा मज़ाक़ है क्योंकि ‘रोज़गार’ का मतलब ही है रोज़ किया जाने वाला काम। इसलिए असल माँग तो साल के 365 दिन पक्के रोज़गार की गारण्टी की होनी चाहिए। लेकिन अभी तो सरकार अपने द्वारा ही बनाये क़ानून के तहत 100 दिन का रोज़गार देने से भी भाग रही है। आँकड़ों के अनुसार पूरे देश में और कलायत में भी मनरेगा के तहत सालाना औसतन 25–30 दिन का ही काम मिल पाता है। गाँवों में बढ़ती महँगाई के बीच मज़दूरों द्वारा अपने परिवार का गुज़ारा करना कठिन हो गया है। ऐसे में मनरेगा ही देहाती क्षेत्र में मज़दूरों का एक सहारा है, लेकिन सरकारें लगातार इसके बजट और कार्यदिवसों में कटौती कर रही हैं।