गोरखपुर मजदूर आन्दोलन ने नयी राजनीतिक हलचल पैदा की
गोरखपुर श्रमिक अधिकार समर्थक समिति की ओर से ‘श्रमिक अधिकार और नागरिक समाज का दायित्व’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि बरगदवां के मजदूर आन्दोलन ने गोरखपुर में काफी समय से व्याप्त अराजनीतिक माहौल को तोड़कर एक नयी राजनीतिक हलचल पैदा की है। वक्ताओं का मानना था कि इस आन्दोलन ने मज़दूरों के मुद्दों को पुरज़ोर ढंग से समाज के सामने रखने का बड़ा काम किया है। अधिकांश वक्ताओं का कहना था कि मुख्यधारा के मीडिया और मध्यवर्गीय शिक्षित आबादी की नज़रों से मज़दूरों के हालात और उनकी समस्याएँ प्रायः छिपी ही रहती हैं। लेकिन पिछले कुछ महीनों के दौरान इस आन्दोलन ने लोगों को इन सवालों पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया। गोष्ठी में शहर के बुद्धिजीवियों, साहित्यकारों, ट्रेडयूनियन कर्मियों, वामपन्थी संगठनों और नागरिक अधिकार संगठनों के प्रतिनिधियों ने भागीदारी की। वक्ताओं ने एक स्वर से शासन और प्रशासन से श्रम क़ानून लागू कराने की माँग की तथा मजदूर आन्दोलन के खिलाफ उद्योगपतियों की ओर से किये जा रहे दुष्प्रचार की कड़ी निन्दा की।


















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