भारत में सूचना तकनीक (आईटी) क्षेत्र के लाखों कर्मचारियों पर लटकी छँटनी की तलवार
मौजूदा हालात ये हैं कि आईआईटी जैसी संस्थाओं में से इस वर्ष 66 फ़ीसदी विद्यार्थी ही कैम्पस प्लेसमेण्ट के दौरान रोज़गार हासिल कर पाये। इंजीनियरिंग करने के बाद हालत यह है कि बड़ी संख्या में नौजवान गले में डिगरी लटकाकर नौकरी के लिए धक्के खा रहे हैं। जो रोज़गार हासिल करने में क़ामयाब हो भी जाते हैं, वे भी छोटी-छोटी कम्पनियों में 10 से 15 हज़ार तक वेतन पर लगातार छँटनी के डर से काम कर रहे हैं। आईटी क्षेत्र की बहुराष्ट्रीय कम्पनियों में रोज़गार हासिल करना मध्यवर्ग का सपना रहा है। क़र्ज़ लेकर या अपनी जि़न्दगी की पूरी कमाई लगा कर मध्यवर्ग का एक बड़ा हिस्सा अपने बच्चों पर निवेश करता है। लेकिन अब यह सपना लगातार टूट रहा है।























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