भारत में लगातार चौड़ी होती असमानता की खाई और जनता की बर्बादी की कीमत पर हो रहे विकास पर एक नजर ! !
देश में उपभोग करने वाली एक छोटी आबादी को चकाचौंध में डूबाने के लिये और अमेरिका-जापान से लेकर यूरोप तक पूरी दुनिया की पूँजी को मुनाफ़े का बेहतर बाज़ार उपलब्ध कराने के लिये जनता के कई अधिकारों को अप्रत्यक्ष रूप से छीना जा चुका है। इसके कई उदाहरण है कि जगह-जगह शोषण-उत्पीड़न के विरुद्ध और अपने अधिकारों के लिये होने वाले मज़दूर आन्दोलनों और जनता की आवाज को दबाने के लिये पुलिस-प्रशासन का इस्तेमाल अब खुले रूप में किया जा रहा है, कश्मीर से लेकर देश के उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में जनता पर सैन्य शासन के साथ ही अब मज़दूर इलाकों में भी मालिकों के कहने पर पुलिस प्रशासन जब चाहे फ़ासीवादी तरीक़े से मज़दूरों का दमन उत्पीड़न कर आतंक फ़ैलाने से बाज नहीं आती। यह सब इसलिये किया जाता है जिससे कि कुछ अमीर लोगों को देश के विकास का हिस्सेदार बनाया जा सके!























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