नयी दुनिया निठल्ले चिन्तन से नहीं, जन महासमर से बनेगी! – डब्ल्यूएसएफ का मुम्बई महातमाशा सम्पन्न
ये ‘बेहतरीन दिमाग’ भूमण्डलव्यापी अन्याय, असमानता और शोषण के अनेकानेक रूपों पर अलग–अलग चर्चा ही इसलिए करना और कराना चाहते हैं ताकि वर्गीय शोषण, अन्याय और असमानता, जिसकी बुनियाद पर अन्य सभी प्रकार की सामाजिक असमानताएं जनमती हैं, पर पर्दा डाला जा सके। डब्ल्यू एस एफ के उस्ताद दिमाग भूमण्डलव्यापी शोषण–उत्पीड़न, अन्याय–असमानता की सच्चाई को जानबूझकर लोगों को उस तरह दिखाना चाहते हैं जैसे किसी अंधे को हाथी दिखायी देता हैं। सूंड पकड़ में आये तो पाइप जैसा, पैर पकड़ में आये तो खम्भे जैसा और कान पकड़ में आये तो सूप जैसा।













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