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आर्काइव
नवम्बर-दिसम्बर 2012
आर्काइव
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“बुरे पूँजीवाद” के ख़िलाफ़ “अच्छे पूँजीवाद” की टुटपूँजिया, मध्यवर्गीय चाहत
कैसा है यह लोकतन्त्र और यह संविधान किनकी सेवा करता है (चौदहवीं किश्त)
‘ब्राण्डेड’ कपड़ों के उत्पादन में लगे गुड़गाँव के लाखों मज़दूरों की स्थिति की एक झलक
स्त्री मज़दूरों और उनकी माँगों के प्रति पुरूष मज़दूरों का दृष्टिकोण (दूसरी किस्त)
मज़दूर वर्ग का नारा होना चाहिए – “मज़दूरी की व्यवस्था का नाश हो!”
बाल ठाकरे: भारतीय फ़ासीवाद का प्रतीक पुरुष
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अक्टूबर 2012
आर्काइव
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मारुति सुज़ुकी मज़दूर आन्दोलन की सफ़लता का एक ही रास्ता आन्दोलन को कारख़ाने की चौहद्दी से बाहर निकालो!
दक्षिण अफ्रीकी कहानी – अँधेरी कोठरी में
पेरिस कम्यून: पहले मज़दूर राज की सचित्र कथा (सातवीं किश्त)
स्त्री मज़दूरों और उनकी माँगों के प्रति पुरुष मज़दूरों का नज़रिया
कैसा है यह लोकतन्त्र और यह संविधान किनकी सेवा करता है? (तेरहवीं किस्त)
रोज़ी-रोटी की तलाश में शहर आये एक मज़दूर की कहानी, उसी की ज़ुबानी
मज़दूरों का अमानवीकरण
भ्रष्टाचार आदिम पूँजी संचय का ही एक रूप है
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अगस्त-सितम्बर 2012
आर्काइव
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मज़दूरों के ख़िलाफ़ एकजुट हैं पूँजी और सत्ता की सारी ताक़तें
भारतीय उपमहाद्वीप में साम्प्रदायिक उभार और मज़दूर वर्ग
पेरिस कम्यून : पहले मज़दूर राज की सचित्र कथा (छठी किश्त)
अपनी तार्किक परिणतियों तक पहुँच गये अण्णा मण्डली और रामदेव के आन्दोलन
दिहाड़ी मज़दूरों की जिन्दगी!
इस जानलेवा महँगाई में कैसे जी रहे हैं मज़दूर
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जुलाई 2012
आर्काइव
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अघोषित आपातकाल की तेज होती आहटें!
पेरिस कम्यून : पहले मज़दूर राज की सचित्र कथा (पाँचवी किश्त)
ब्रह्माण्ड के रहस्यों को सुलझाने की दिशा में बढ़ा इन्सान का एक और क़दम
जॉन रीड : कम्युनिज़्म के लक्ष्य को समर्पित बुद्धिजीवी
मुनाफे के लिए इन्सानों की जान से खेलती दवा कम्पनियाँ
दलित मुक्ति का रास्ता मज़दूर इंक़लाब से होकर जाता है, पहचान की खोखली राजनीति से नहीं!
स्त्री मज़दूरों का संघर्ष श्रम की मुक्ति के महान संघर्ष का हिस्सा है
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जून 2012
आर्काइव
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संकट के दलदल में धँस रही भारतीय अर्थव्यवस्था
मौत के मुहाने पर : अलंग के जहाज़ तोड़ने वाले मज़दूर
कड़वे बादाम : दिल्ली के बादाम उद्योग में मज़दूरों का शोषण
पेशागत बीमारियों और इलाज में उपेक्षा की दोहरी मार झेलती हैं स्त्री मज़दूर
पेरिस कम्यून : पहले मज़दूर राज की सचित्र कथा (चौथी किश्त)
स्वतन्त्र दिहाड़ी मज़दूरों से जुड़ी विशेष माँगें
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मज़दूर बिगुल – मई 2012
आर्काइव
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मज़दूर आन्दोलन के क्रान्तिकारी पुनर्जागरण के लिए आगे बढ़ो! टुकड़ों-रियायतों के लिए नहीं, समूची आज़ादी के लिए लड़ो!
मज़दूर वर्ग से ग़द्दारी और मार्क्सवाद को विकृत करने का गन्दा, नंगा और बेशर्म संशोधनवादी दस्तावेज़
ग़ुलामों की तरह खटने वाले घरेलू मज़दूरों को उनकी माँगों पर संगठित करना होगा
पूँजी के ऑक्टोपसी पंजों में जकड़ी स्त्री मज़दूर
मई दिवस की कहानी
पेरिस कम्यून : पहले मज़दूर राज की सचित्र कथा (तीसरी किश्त)
रिकॉर्ड अनाज उत्पादन के बावजूद देश का हर चौथा आदमी भूखा क्यों है?
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मज़दूर बिगुल – अप्रैल 2012
आर्काइव
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पूँजीपतियों की सेवा में एक और बजट
ग्रामीण व खेतिहर मज़दूरों की प्रमुख माँगें और उनकी अपनी यूनियन की ज़रूरत
ये दरिद्रता के आँकड़े नहीं बल्कि आँकड़ों की दरिद्रता है
पेरिस कम्यून : पहले मज़दूर राज की सचित्र कथा (दूसरी किश्त)
घरेलू मज़दूरों के निरंकुश शोषण पर एक नज़र
मज़दूर का अलगाव – कार्ल मार्क्स
सत्ता की बर्बरता की तस्वीर पेश करती हैं हिरासत में होने वाली मौतें
पीसरेट पर काम करने वाली स्त्री मज़दूरों की अँधेरी ज़िन्दगी
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मज़दूर बिगुल – मार्च 2012
आर्काइव
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गहराते जन-असन्तोष से निपटने के लिए दमनतन्त्र को मज़बूत बनाने में जुटे हैं लुटेरे शासक वर्ग
करावलनगर में इलाक़ाई मज़दूर यूनियन की पहली सफल हड़ताल
मारुति के मज़दूर आन्दोलन से उठे सवाल
बरगदवा, गोरखपुर का मज़दूर आन्दोलन कुछ ज़रूरी सबक़, कुछ कठिन चुनौतियाँ
राजनीतिक उद्वेलन और प्रचार कार्य का महत्व / लेनिन
महज़ पूँजीवाद-विरोध पर्याप्त नहीं है! हमें पूँजीवाद का विकल्प पेश करना होगा!
मज़दूर वर्ग और समाजवाद को समर्पित एक सच्चा बुद्धिजीवी: जॉर्ज थॉमसन
चार्टिस्टों का गीत / टॉमस कूपर
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अगस्त-सितम्बर 2011
आर्काइव
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अण्णा हज़ारे का आन्दोलन झूठी उम्मीद जगाता है
अमेरिकी साम्राज्यवाद का कर्ज़ संकट
ब्रिटेन में ग़रीबों का विद्रोह – संकटग्रस्त दैत्य के दुर्गों में ऐसे तुफ़ान उठते ही रहेंगे
कैसा है यह लोकतन्त्र और यह संविधान किनकी सेवा करता है? (बारहवीं किस्त)
माँगपत्रक शिक्षणमाला – 8 स्त्री मज़दूर सबसे अधिक शोषित-उत्पीड़ित हैं (दूसरी किस्त)
ग़रीबों की जान से खेलकर होती है दवाओं की परख
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जुलाई 2011
आर्काइव
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बेहिसाब बढ़ती महँगाई सरकार की लुटेरी नीतियों का नतीजा है
सुधार के नीमहकीमी नुस्ख़े बनाम क्रान्तिकारी बदलाव की बुनियादी सोच
चीन के लुटेरे शासकों के काले कारनामे महान चीनी क्रान्ति की आभा को मन्द नहीं कर सकते
अमेरिका है दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवादी!
बुर्जुआ चुनावों और क़ानूनी संघर्षों के बारे में सर्वहारा क्रान्तिकारी दृष्टिकोण
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चुनाव सिर्फ यह है कि ठगों-लुटेरों-अपराधियों का कौनसा गिरोह हमारे ऊपर हुकूमत करेगा
एक नये क्रान्तिकारी मजदूर अख़बार की जरूरत
पेरू : जुल्म के अंधेरे में चमकता लाल निशान
श्रमिक क्रान्ति निश्चय की साम्राज्यवाद-पूँजीवाद का नाश करेगी / भगतसिंह
मजदूरों के लिए आजादी और खुशहाली का रास्ता क्या है – लेनिन
मैक्सिम गोर्की : मेहनतकश जनता का सच्चा लेखक
बोल मजूरे हल्ला बोल / कान्तिमोहन
नई पेंशन योजना : मजदूरों को ठगने-लूटने की एक और साजिश
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